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सोने की बेड़ियों में यहां बंधे हैं वीर हनुमान...!

बेड़ी हनुमान मंदिर भक्त और भगवान के बीच अनूठे संबंध की कहानी कहता है। जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करने वाला हर भक्त बेड़ी हनुमान जरूर जाता है। इसकी वजह यह बताई जाती है कि जो भक्त जगन्नाथ स्वामी के दर्शन करके आते हैं, हनुमान उनकी ही आंखों के जरिये यहां प्रभु के दर्शन करते हैं।

यहां शिवलिंग पर जल अर्पण से आती है 'ॐ' की प्रतिध्‍वनि...

नर्मदा नदी के किनारे बसे नगर नेमावर के प्राचीन सिद्धनाथ महादेव के मंदिर की प्रसिद्धि दूर-दूर तक है। महाभारत काल में नाभिपुर के नाम से प्रसिद्ध यह नगर व्यापारिक केंद्र हुआ करता था। राज्य शासन के रिकॉर्ड में इसका नाम 'नाभापट्टम' था। यहीं पर नर्मदा नदी का 'नाभि' स्थान है...

Khatu Shyam Ji: The God of Faith and the Support of the Helpless

Khatu Shyam Ji is one of the most admired deities in Hinduism, worshipped with immense devotion across India. His holy temple is in Khatu village of Sikar district, Rajasthan, which is a major pilgrimage destination. Devotees lovingly call him “Haare Ka Sahara”, meaning the support to those who have lost hope.

गोवर्धन, एक जीवंत पर्वत

गोवर्धन केवल मिट्टी का एक टीला नहीं है, बल्कि एक जीवित देवता हैं, जिन्हें श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से बृजवासियों को बचाने के लिए उठाया था। सात दिन तक यह पर्वत करुणा की छतरी बनकर गायों, संतों, ऋषियों और ग्रामीणों को आश्रय देता रहा। आज भी यह पर्वत श्रद्धा की सांसें लेता है। 21 किलोमीटर की परिक्रमा पथ पर नंगे पांव चलने वाले श्रद्धालु गीत, आंसू और प्रार्थनाओं के साथ अपनी भक्ति समर्पित करते हैं।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और शिवालय तीर्थ महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में एलागंगा नदी और एलोरा गुफाओं के नज़दीक स्थित है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह आखिरी ज्योतिर्लिंग है। यहां की यात्रा शिवालय तीर्थ, ज्योतिर्लिंग और लक्ष्य विनायक गणेश के दर्शन से पूर्ण होती है। ये सभी तीर्थस्थल 500 मीटर के दायरे में स्थित हैं। बाहर से देखने पर घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सामान्य मंदिरों की भांति ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर जाकर देखने से इसकी महत्ता और भव्यता स्पष्ट होती है। इस क्षेत्र में कई अन्य धर्मावलम्बियों के भी पवित्र स्थान हैं।

उज्जैन का काल भैरव मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर, क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित काल भैरव मंदिर एक ऐसी रहस्यमयी जगह  है, जहां धार्मिक, तांत्रिक और ऐतिहासिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। लगभग छह हजार साल पुराना यह मंदिर प्रभावशाली वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

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