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उज्जैन का काल भैरव मंदिर

मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर से करीब आठ किलोमीटर दूर, क्षिप्रा नदी के तट पर स्थित काल भैरव मंदिर एक ऐसी रहस्यमयी जगह  है, जहां धार्मिक, तांत्रिक और ऐतिहासिक परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। लगभग छह हजार साल पुराना यह मंदिर प्रभावशाली वास्तुकला का एक बेहतरीन उदाहरण है।

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग दर्शन

घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग और शिवालय तीर्थ महाराष्ट्र के औरंगाबाद ज़िले में एलागंगा नदी और एलोरा गुफाओं के नज़दीक स्थित है। शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से यह आखिरी ज्योतिर्लिंग है। यहां की यात्रा शिवालय तीर्थ, ज्योतिर्लिंग और लक्ष्य विनायक गणेश के दर्शन से पूर्ण होती है। ये सभी तीर्थस्थल 500 मीटर के दायरे में स्थित हैं। बाहर से देखने पर घृष्णेश्वर ज्योतिर्लिंग मंदिर सामान्य मंदिरों की भांति ही दिखाई देता है, लेकिन अंदर जाकर देखने से इसकी महत्ता और भव्यता स्पष्ट होती है। इस क्षेत्र में कई अन्य धर्मावलम्बियों के भी पवित्र स्थान हैं।

गोवर्धन, एक जीवंत पर्वत

गोवर्धन केवल मिट्टी का एक टीला नहीं है, बल्कि एक जीवित देवता हैं, जिन्हें श्रीकृष्ण ने इंद्र के क्रोध से बृजवासियों को बचाने के लिए उठाया था। सात दिन तक यह पर्वत करुणा की छतरी बनकर गायों, संतों, ऋषियों और ग्रामीणों को आश्रय देता रहा। आज भी यह पर्वत श्रद्धा की सांसें लेता है। 21 किलोमीटर की परिक्रमा पथ पर नंगे पांव चलने वाले श्रद्धालु गीत, आंसू और प्रार्थनाओं के साथ अपनी भक्ति समर्पित करते हैं।

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